Tuesday, October 4, 2022

CIMS में पहली बार पैंक्रियाज की दुर्लभ सर्जरी: साढ़े पांच घंटे के ऑपरेशन के बाद निकाला नियोप्लास्टिक ट्यूमर, पेशेंट को मिली नई जिंदगी

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बिलासपुर25 मिनट पहले

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बीमारी से अनजान पेट दर्द से परेशान था मरीज।

बिलासपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) में पहली बार पैंक्रियाज की दुर्लभ बीमारी का सफल ऑपरेशन हुआ। सर्जरी के बाद मरीज वृद्ध को नई जिंदगी मिली है। वृद्ध के प्रैंक्रियाज के टेल में 10 बाई सात बाई छ सेंटीमीटर नियोप्लास्टिक ट्यूमर स्प्लीन से सटा हुआ था, जिसकी पहचान कर डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और उसे बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद अब मरीज सामान्य और स्वस्थ्य है।

जांजगीर-चांपा निवासी 64 वर्षीय रथ लाल धोबी पेट दर्द से परेशान था। इसके साथ ही वह डायबिटीज और हाइपरटेंशन से ग्रसित था। उसने जांजगीर में वरिष्ठ मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. यूसी शर्मा से प्राथमिक इलाज कराया। इसके बाद उसे सीटी स्कैन कराने के लिए बिलासपुर के रेडियोलाजिस्ट डॉ. पवन कुमार गुप्ता के पास भेजा गया। जांच में उसके पैंक्रियाज में नियाप्लास्टिक ट्यूमर होने का पता चला।

CIMS में पैंक्रिियाज की दुर्लभ बीमारी का पहली बार हुआ ऑपरेशन।

CIMS में पैंक्रिियाज की दुर्लभ बीमारी का पहली बार हुआ ऑपरेशन।

10x7x6 सेंटीमीटर दुर्लभ नियोप्लास्टिक ट्यूमर स्प्लीन से सटे होने की हुई पहचान
जांच के दौरान पता चला कि मरीज के पैंक्रियाज के टैल में 10x7x6 सेंटीमीटर का दुर्लभ नियोप्लास्टिक ट्यूमर स्प्लीन से सटा हुआ है। इस बीमारी के पकड़ में आने पर डॉ. यूसी शर्मा ने उसे CIMS में सर्जन डॉ. मृणाल शर्मा के पास रेफर किया। उन्होंने मरीज को भर्ती कर ऑपरेशन के लिए तैयारी की। सर्जरी से पहले डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी कर देखा गया कि बीमारी फैली हुई तो नहीं है। इसके बाद मरीज़ का डिस्टल पैन्क्रियाएक्टोमी और स्प्लेनेक्टोमी ऑपरेशन किया गया। ऑपरेटिव टीम में सर्जन डॉ. मृणाल शर्मा, डॉ विनोद तामकनंद और सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. नीरज शेन्दे शामिल थे। सफल ऑपरेशन के बाद अब मरीज़ को नियमित फ़ॉलो-अप में रखा गया है। CIMS के सर्जरी यूनिट-वन टीम के सहयोग से यह दुर्लभ बीमारी का सफल सर्जरी कर निदान किया गया।

CIMS के सर्जन डॉ. मृणाल शर्मा और उनकी टीम ने सफल सर्जरी की।

CIMS के सर्जन डॉ. मृणाल शर्मा और उनकी टीम ने सफल सर्जरी की।

आधुनिक तकनीक से हुआ ऑपरेशन
CIMS के अधीक्षक व सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. नीरज शिन्दे की पहल पर पहली बार सर्जरी में कवीडिएन लिगासुर वेसल सीलिग अल्ट्रासोनिक स्केलपेल सिस्टम का प्रयोग किया गया। एनेस्थीसिया विभाग के HOD डॉ. राकेश निगम के निर्देशन में डॉ. मिल्टन ने जनरल एनेस्थीसिया दिया और स्टाफ़ नर्स रीटू व ओटी स्टाफ़ संतोष पाण्डेय ने सर्जरी में असिस्ट किया। ऑपरेशन के बाद मरीज अब मरीज सामान्य है। उसे अब सिम्स से डिस्चार्ज करने की तैयारी चल रही है।

बहुत कम होती है यह बीमारी
डॉ. मृणाल शर्मा ने बताया कि आमतौर पर यह बीमारी रेयर होती है। इसका इलाज और सर्जरी भी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में संभव है लेकिन, हमने अपनी टीम के साथ CIMS में इसकी सफल सर्जरी की।

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