Monday, October 3, 2022

Chhattisgarh: डॉक्टरों ने खून के थक्के को बनाया भाप, पहली बार दिल के मरीज की हुई लेजर तकनीक से एंजियोप्लास्टी

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छत्तीसगढ़ के एक सरकारी अस्पताल में पहली बार लेजर तकनीक से एंजियोप्लास्टी की गई है। डॉक्टरों का दावा है कि देश में भी पहली बार एंजियोप्लास्टी के लिए लेजर तकनीक का सहारा लिया गया है। डॉक्टरों ने बताया, इस तकनीक से मरीज की दिल की नली में बने खून के थक्के को भाप में बदला गया, जिससे मरीज की जान बच गई। 

मामला एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट मेडिकल कॉलेज, रायपुर का है। यहां बीते मंगलवार को एक हार्ट अटैक का मरीज पहुंचा था। जांच में पता चला, मरीज की दिल की नली में खून का थक्का जम गया है। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की अन्य जांच भी की। 

पहली बार लेजर तकनीक का हुआ इस्तेमाल
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया, मरीज की उम्र सिर्फ 30 साल थी। ऐसे में हमने नली में जमे खून के थक्के को भाप बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया, इस तकनीक की मदद से आधे घंटे के अंदर व्यक्ति की रक्त की नली में जमा थक्का भाप बन गया और रक्त संचार सुचारू रूप से होने लगा, जिससे उसकी जान बच गई।

विस्तार

छत्तीसगढ़ के एक सरकारी अस्पताल में पहली बार लेजर तकनीक से एंजियोप्लास्टी की गई है। डॉक्टरों का दावा है कि देश में भी पहली बार एंजियोप्लास्टी के लिए लेजर तकनीक का सहारा लिया गया है। डॉक्टरों ने बताया, इस तकनीक से मरीज की दिल की नली में बने खून के थक्के को भाप में बदला गया, जिससे मरीज की जान बच गई। 

मामला एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट मेडिकल कॉलेज, रायपुर का है। यहां बीते मंगलवार को एक हार्ट अटैक का मरीज पहुंचा था। जांच में पता चला, मरीज की दिल की नली में खून का थक्का जम गया है। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की अन्य जांच भी की। 

पहली बार लेजर तकनीक का हुआ इस्तेमाल

डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया, मरीज की उम्र सिर्फ 30 साल थी। ऐसे में हमने नली में जमे खून के थक्के को भाप बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया, इस तकनीक की मदद से आधे घंटे के अंदर व्यक्ति की रक्त की नली में जमा थक्का भाप बन गया और रक्त संचार सुचारू रूप से होने लगा, जिससे उसकी जान बच गई।



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