Sunday, October 2, 2022

55 ई-साक्षर सेंटर खामोश: 2019 में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खुले, एक माह में 9 हजार से ज्यादा की ट्रेनिंग, इसके बाद बजट रुका और एक-एक कर बंद

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रायपुर15 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद निजाम

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ई साक्षर केंद्र में पहले ऐसे ट्रेनिंग दी जाती थी, लेकिन अब यहां ताला लग गया है।

छत्तीसगढ़ के 28 जिलों के शहरी इलाकों में 2019 में खोले गए 55 से ज्यादा ई-साक्षर केंद्र सालभर में ही खामोशी से बंद कर दिए गए। ये केंद्र उनके लिए खुले थे, जो स्मार्ट मोबाइल यूज करते हैं लेकिन कोई एप या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें आता नहीं। ऐसे ही लोगों को घर बैठे बिजली के बिल से लेकर बाकी टैक्स अदा करने तथा मोबाइल के बहुउद्देशीय उपयोग की ट्रेनिंग देने के लिए ई-साक्षर सेंटर का कांसेप्ट लाया गया।

सालभर में 9 हजार से ज्यादा लोगों ने सारी चीजें सीखीं, लेकिन योजना के लिए बजट का प्रावधान ही नहीं था, इसलिए केंद्र बन होने लगे। अब इसी स्कीम को केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में शामिल कर लिया है। इससे प्रदेश के शिक्षा विभाग में नई उथलपथल मचा दी है। केंद्र सरकार की ओर से जारी नई शिक्षा नीति के न्यू इंडिया लिट्रेसी एजुकेशन में ई साक्षर कांसेप्ट की डिजीटल शिक्षा को अहमियत दी गई है।

केंद्र से जारी गाइड लाइन में भी कांसेप्ट हुबहू ई साक्षर वाला है। इसमें भी ई साक्षर स्कीम की तरह ही 14 से 60 साल तक के लोगों को इंटरनेट के इस्तेमाल से लेकर एक-एक विभाग के एप डाउनलोड करने की ट्रेनिंग देने का टारगेट रखा गया है। डिजिटल शिक्षा के तहत लोगों को ये भी बताना है कि किस तरह घर बैठे ऐसे काम किए जा सकते हैं जिनके लिए उन्हें अभी सरकारी दफ्तरों में लंबी लंबी लाइन लगानी पड़ रही है।

शिक्षा विभाग में हैरानी है कि जिस ई साक्षरता क्लास को उन्होंने अनावश्यक मानकर बजट नहीं दिया। उसे केंद्र सरकार ने लांच कर दिया है तो अब उन्हें यह कवायद फिर शुरू करनी होगी। राज्य में ई-साक्षरता क्लास जब 2019 में शुरू की गई थी, तब उसे पायलेट प्रोजेक्ट के तहत योजना को लांच किया गया। इसके तहत हर जिले में औसतन 2-2 सेंटर चालू किए गए। इस तरह 55 सेंटरों में एक साल में करीब साढ़े नौ हजार लोगों को मोबाइल के माध्यम से ई शिक्षा दी गई।

एक माह तक 2 घंटे की क्लास

ई-साक्षरता क्लास पूरी तरह से शहरी क्षेत्र के लिए लांच की गई थी। क्लास एक महीने के लिए थी। दो दो घंटे की क्लास के लिए हर दिन का पूरा टाइम टेबल विभाग की ओर से तय किया गया। पहले दिन मोबाइल और कंप्यूटर क्या है? इसकी ट्रेनिंग व जानकारी देनी थी। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें स्मार्ट फोन के एक-एक फंक्शन की जानकारी देने के साथ एप के बारे में बताना था। एक-एक सरकारी विभाग के एप डाउनलोड कर ये बताना था कि किस तरह एप की मदद से घर बैठे कई काम निपटाए जा सकते हैं।

शहर में सर्वे के बाद ही ई-एजुकेटर ढूंढते थे लोगों को

ई साक्षर सेंटर में ट्रेनिंग देने के लिए ई एजुकेटर नियुक्त किए गए थे। ये ई एजुकेटर शहर में सर्वे कर ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जो स्मार्ट फोन का उपयोग तो करते हैं, लेकिन केवल बातें करने के लिए। स्मार्ट फोन के फायदे और बाकी उपयोग की जानकारी उन्हें नहीं थी। वे ऐसे लोगों को सेंटर में बुलाते थे।

एक सेंटर में एक महीने में 50 लोगों की बैच तय की गई थी। उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए 2 ई एजुकेटर नियुक्त किए गए थे। ट्रेनिंग लेने वाले एक स्टूडेंट के एवज में ई एजुकेटर का मानदेय 500 तय किया गया था। ट्रेनिंग लेने वाले 50 तक होने से एक ई एजुकेटर को साढ़े बारह हजार तक मानदेय मिल रहा था। यानी सेंटर रोजगार अलग दे रहे थे।

बिल्डिंग सरकारी, बजट डेढ़ करोड़, फिर भी सेंटर बंद

ई साक्षर योजना के तहत ट्रेनिंग सेंटर किसी भी सरकारी स्कूल या ऐसे ही किसी भवन में शुरू किए गए थे। वहां न तो बिजली का खर्च था न कुर्सी टेबल का। केवल दो कंप्यूटर खरीदकर दिए गए थे। इस पर डेढ़ करोड़ का बजट ही खर्च हो रहा था। ई एजुकेटर के पास मोबाइल था। वे मोबाइल और कंप्यूटर की मदद से ट्रेनिंग देते थे।

इन सुविधाओं की ट्रेनिंग

  • ऑनलाइन सिस्टम से बिल भुगतान
  • मकान और निगम का टैक्स भुगतान
  • सभी रिचार्ज (मोबाइल से डीटीएच तक)
  • जमीन के रिकार्ड घर बैठे देख पाना
  • आरटीओ से संबंधित ऑनलाइन काम
  • सभी प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन आवेदन
  • आधार कार्ड और पेन कार्ड की अर्जियां
  • गुमाश्ता जैसे लाइसें के लिए आवेदन
  • रेलवे रिजर्वेशन व ट्रेनों की जानकारी

योजना क्यों बंद हुई, इसका परीक्षण करेंगे। बजट नहीं मिला होगा, इसलिए सेंटर बंद हुए होंगे। केंद्र ने अगर इसे शिक्षा नीति में शामिल किया है, तो राज्य सरकार की सहमति से फिर चालू करेंगे-राजेश राणा, संचालक राज्य साक्षरता मिशन

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