Friday, September 30, 2022

शादी के एक महीने बाद ही अलग-अलग रहने लगे थे पति-पत्नि, मामला पहुंचा हाई कोर्ट, अदालत ने कहा…

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Gwalior: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के एक मामले पति के वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश को बरकार रखा है. अदालत ने कहा है कि पति और पत्नी दोनों से समायोजन और सह-अस्तित्व की भावना के साथ रहने की उम्मीद की जाती है. कोर्ट ने आगे कहा कि विवाह के आधार पर और विवाह के बाद दो व्यक्तियों को एक दर्जा मिलता है, आपसी विश्वास और विश्वास की भावना के साथ उस स्थिति को बनाए रखना दंपति का कर्तव्य है.

पत्नी हुई सुलह के लिए राजी
न्यायमूर्ति रोहित आर्य और न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने यह टिप्पणी पत्नी द्वारा पति के पक्ष में दिए गए वैवाहिक अधिकारों की बहाली (आरसीआर) के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर विचार करते हुए की. हालांकि सुनवाई के दौरान महिला ने अपने पति के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की और कहा कि उसका तत्काल अपील करने का कोई इरादा नहीं है. वहीं उसके पति ने अदालत को यह आश्वासन किया कि अगर वह उसके साथ रहती है तो वह उसे पूरी गरिमा और सम्मान के साथ रखेगा, ताकि दोनों एक सम्मानजनक और आरामदायक जिंदगी जी सकें.

शादी के बाद जो दर्जा मिला है उसका सम्मान करें

अदालत ने देखा कि पति और पत्नी दोनों सुलह करना चाहते हैं. इसके साथ पत्नी की ओर से पति के खिलाफ अपील करने के बाद भी पति द्वारा उसे अपनाने की भावना को देखते हुए अदालत ने उसकी सराहना भी की और ग्वालियर जिले के डबरा के प्रथम अपर जिला न्यायाधीश के आरसीआर के फैसले को बरकरार रखा. हालांकि मामले पर सुनवाई खत्म करने से पहले कोर्ट ने कहा कि हम पति-पत्नी से जीवन में सामंजस्य और आपसी समझ के साथ जीने की उम्मीद करते हैं. शादी के बाद समाज में जो उन्हें दर्जा मिला है, आपसी विश्वास और विश्वास की भावना के साथ उस स्थिति को बनाए रखना दंपति का कर्तव्य है.

क्या था मामला
बता दें कि दोनों की शादी अप्रैल 2015  में हुई थी, लेकिन एक महीने बाद ही दोनों अलग-अलग रहने लगे. इसके बाद, प्रतिवादी-पति ने मई 2018 में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत एक याचिका दायर करके वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए प्रथम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, डबरा, जिला ग्वालियर के न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. सबूतों और दलीलों के आधार पर कोर्ट ने पति के विवाह के अधिकारों की बहाली का आदेश दिया था. इसे ही उसकी पत्नी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

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