Friday, September 30, 2022

लुटेरा होने के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर ली शख्स की जान, पुलिस ने जांच में बेकसूर पाया

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Highlights

  • निजी विवाद के चलते उस शख्स के पड़ोसियों ने मृतक को जानबूझ कर फंसाया था।
  • मृतक की अंत्येष्टि के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन में भी 2 लोग मारे गए थे।
  • स्नूकर क्लब में विवाद होने के बाद उसके 3 पड़ोसियों ने उसे फंसाया था।

कराची: पाकिस्तान के जिस व्यक्ति को पिछले हफ्ते कराची में लुटेरा होने के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, वह पुलिस की जांच में बेकसूर पाया गया। दरअसल, निजी विवाद के चलते उस शख्स के पड़ोसियों ने उसे जानबूझ कर फंसाया था। एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि घटना के चलते मृतक के परिजनों और कस्बा कॉलोनी में उसके आस-पड़ोस के लोगों ने उसकी अंत्येष्टि के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें 2 लोग मारे गए थे।

‘वह लुटेरा नहीं था बल्कि…’

SSP मारूफ उस्मान ने कहा कि एक कमेटी द्वारा जांच के बाद यह पाया गया कि भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डाला गया व्यक्ति लुटेरा नहीं था और स्नूकर क्लब में विवाद होने के बाद उसके 3 पड़ोसियों ने उसे फंसाया था। उन्होंने कहा, ‘वह बेकसूर था और व्यक्तिगत झगड़े के कारण उसे जानबूझकर उसके पड़ोसियों द्वारा लूटपाट के लिए फंसाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि लूट की कोई घटना नहीं हुई थी।’

कराची में बढ़ रही हैं लिंचिंग की घटनाएं
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर में संदिग्ध लुटेरों और अपराधियों को पीट-पीट कर मार डालने (Lynching in Pakistan) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि सड़क पर होने वाले अपराधों और लूटपाट से तंग आ चुके लोग कानून अपने हाथ में लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। मारूफ ने बताया कि इस घटना में उस व्यक्ति का अपने पड़ोस के एक स्नूकर क्लब में अपने 3 पड़ोसियों के साथ विवाद हो गया था। उन्होंने बताया, ‘उनके बीच हाथापाई होने के बाद, संदिग्ध व्यक्ति भागने लगे और शोर मचाना शुरू कर दिया कि लुटेरे उनका पीछा कर रहे हैं।’

‘जांच में पता चला कि वह बेकसूर था’
SSP ने कहा, ‘इसके बाद भीड़ जमा हो गई और पीछा करने वाले व्यक्तियों की पिटाई की जिनमें से एक की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। उसका एक दोस्त बुरी तरह घायल हो गया और एक अन्य को पुलिस ने बचा लिया। पुलिस द्वारा की गयी पूरी जांच में यह पता चला कि वह व्यक्ति निर्दोष था।’ मारूफ ने कहा कि उन्होंने इलाके के बुजुर्गों की मदद से सच्चाई का पता लगाया। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की दुखद घटनाएं समाज में असहिष्णुता और भीड़ की मानसिकता के स्तर को दर्शाती हैं।

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