Wednesday, October 5, 2022

माध्यमिक शाला और हाई स्कूल के बच्चे सीखेंगे रोजगार के हुनर

More articles


Publish Date: | Wed, 15 Jun 2022 10:12 PM (IST)

कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अच्छे कैरियर के लिए संघर्ष करने की नौबत न आए, इसके लिए स्कूल शिक्षा के दौर में ही रोजगार के हुनर सीखाने की योजना पर शिक्षा विभाग काम कर रही। इससे बच्चों को स्कूल में शिक्षा के साथ भविष्य में अपने लिए सही राह के निर्माण में मदद मिलेगी। प्रत्येक कक्षा के लिए बन रही योजना में माध्यमिक शाला के बच्चे मूर्तिकला या कोई अन्य हुनर सीखेंगे, तो हाई स्कूल के बच्चे वेल्डिंग व कृषि औजारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इस तरह युवावस्था से पहले दक्ष बनाने की कवायद की जा सकेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अब सत्र 2022-23 से धरातल में लाने तैयारी तेज हो चुकी है। इसके तहत बच्चे अपने स्कूल में पढ़ाई के साथ कोई एक अन्य कला भी सीख सकेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या बनाई गई है। इसके तहत 25 नए शिक्षा के विषयों की रूपरेखा तैयार की गई है। विषय विशेषज्ञों व अलग क्षेत्र में महारत प्राप्त शिक्षाविदों के मार्गदर्शन से पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। इनमें से सुविधा व व्यवस्था के अनुरूप जिले के शासकीय स्कूलों में बच्चों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग के विषय चयन कर उनमें कौशल उन्नायन के लिए नियमित प्रशिक्षण से जोड़ा जा सकेगा। आने वाले 20 से 30 साल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कोर्स तैयार किए गए हैं। आने वाले दिनों में मूल्य और पर्यावरण शिक्षा का लाभ सभी वर्ग के लोगों को मिल सके। इसे मुख्य कोर्स की तरह शामिल किया जा रहा है। इसमें अलग से किताब की जरूरत नहीं होगी। इससे बच्चों की सही रुचि की जानकारी मिल सकेगी और उनका भविष्य तय हो सकेगा। भविष्य में शिक्षा में बदलाव, पाठ्यक्रम की आवश्यकता और चुनौतियों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

परंपरागत कार्य से जोड़ेंगे

विभिन्ना कोर्स, ट्रेड, कला या तकनीक में बच्चों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विषय का चयन भी एक महत्वपूर्ण बिंदू है। इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि जिस विषय या कोर्स में बच्चों के लिए कौशल उन्नायन की राह तैयार की जाएगी, उसका स्थानीय महत्व अवश्य हो। स्थानीय जरूरत, प्रचलन और संसाधनों के अनुरूप ही कौशल प्रशिक्षण का विषय चयन किया जाएगा। उदाहरण के लिए कोरबा जिले में छुरी समेत ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां कोकून उत्पादन, रेशम के धागों और कोसा के कपड़ों का कार्य परंपरागत रूप से किया जाता है। संभव है कि ऐसे परंपरागत कार्यों से जुड़े क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में कोसाकला में बच्चों को परंगत करने पहल की जा सके।

छिपी प्रतिभा आएगी सामने

नई शिक्षा नीति के तहत छठवीं कक्षा से बच्चों को वोकेशनल कोर्स से जोड़ा जाएगा। इसकी कार्ययोजना तैयार हो रही है, जिसमें सबसे पहले उन्हें वोकेशनल कोर्स का परिचय दिया जाएगा। उन्हें परियोजना कार्य भी दिया जाएगा। इससे पढ़ाई के साथ उनका हुनर भी सामने आएगा। आगे क्या बनना चाहते हैं और किस क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं, यह तय हो सकेगा। वोकेशनल कोर्स के तहत बच्चों को मूर्तियां बनाने, कृषि औजार बनाने, कपड़ों की बुनाई, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डिंग समेत अन्य कार्यों के बारे में बताया जाएगा, इससे उनके भीतर छिपी प्रतिभा और नई जानकारियां सामने आ सकेंगी।

योजना के तहत इस साल से सभी बच्चों के लिए शुरू किया जाएगा। छठवीं से ही नहीं, हर कक्षा के बच्चों के लिए कौशल विकसित करने योजना बनाई जा रही है।

– जीपी भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

 



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest