Monday, October 3, 2022

बिलासपुर में बेतरतीब खोदाई की वजह से गिरकर मर रहे पेड़

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Publish Date: | Fri, 08 Jul 2022 11:20 AM (IST)

बिलासपुर। कुदुदंड स्थित संजय तरण पुष्कर(स्वीमिंग पुल) के उद्यान में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। काम्प्लेक्स का बेस बनाने के लिए 20 फीट गड्ढा खोदा गया है। बेतरतीब खोदाई के कारण 30 से 40 साल पुराने पेड़ों की जड़ें कमजोर पड़ गईं। ऐसी स्थिति में हुई तेज वर्षा के बाद मिट्टी में कटाव होने से सात पेड़ गिर चुके हैं। साथ ही 15 पेड़ झुक गए हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इसके बाद भी निगम के जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। साफ है विकास के नाम पर बेवजह पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है।

स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण शुरू होते ही कुछ पेड़ों की बलि दे दी गई। ये पेड़ भवन के क्षेत्र में आ रहे थे। लेकिन अब इस उद्यान के किनारे लगे पेड़ भी लापरवाही की भेंच चढ़ रहे हैं। ठेका कंपनी श्रद्धा कंस्ट्रक्शन ने बेस निर्माण बेतरतीब ढंग से किया है। इसकी वजह से पेड़ों के बाजू में जमीन ही गायब हो गई। इससे पेड़ जमीन से अपनी पकड़ खो चुके हैं। वहीं मंगलवार की रात हुई वर्षा ने इन पेड़ों की पकड़ और भी कमजोर हो गई। जमीन का कटाव होने से सात पेड़ गिर गए। अब बचे पेड़ भी झुक गए हैं।

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वर्षा होने पर इनके गिरने की आशंका है। यदि तत्काल इस पर ध्यान दिया गया तो पेड़ों को बचाया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत नगर निगम के अधिकारियों से नहीं है। तरण ताल के स्थाई सदस्यों के साथ आसपास के रहवासियों ने महापौर रामशरण यादव, नगर निगम आयुक्त अजय कुमार त्रिपाठी को इसकी जानकारी दी है। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पेड़ों को ध्यान में रखते हुए ड्राइंग-डिजाइन किया गया था बदलाव

स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स की मूल ड्राइंग डिजाइन के अनुसार करीब 40 पेड़ों की बलि दी जानी थी। इसकी जानकारी होने पर स्वीमिंग पुल के स्थाई सदस्यों ने विरोध किया। महापौर और निगम आयुक्त को इसकी जानकारी देकर ड्राइंग में बदलाव किया गया। इसकी वजह से कुछ पेड़ कटने से बच गए। लेकिन निर्माण के दौरान इन पेड़ों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया।

विरोध में आए रहवासी

संजय तरण पुष्कर के पास रहने वाले मंगल सिंह ने बताया कि पेड़ों को लेकर अधिकारी बेपरवाह हैं। एक ओर पेड़ों के बचाने के लिए शासन हरसंभव प्रयास कर रहा है। वहीं गैर जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि इन पेड़ों की जान लेने पर तुले हैं। पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ा तो करेंगे।

विकास का विरोध नहीं, पेड़ों को बचाने का है प्रयास

स्थानीय रहवासी जयेश तिवासी ने बताया कि विकास कार्य का कोई विरोध नहीं है। लेकिन विकास के नाम पर पेड़ों की बलि दी जा रही है। जबकि ध्यान दिया जाए तो इन पेड़ों को बचाया जा सकता है। इसकी जानकारी बार-बार देने के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हर हाल में पेडों को बचाया जाएगा।

कौन है जिम्मेदार

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। इसके एमडी अजय कुमार त्रिपाठी है। उनकी निगरानी में ठेका कंपनी काम्प्लेक्स का निर्माण कर रही है। लेकिन सही तरीके से निगरानी नहीं होने से ठेकेदार मनमर्जी से काम कर रहा है। खोदाई करते हुए पेड़ों की जान ले रहे हंै। इसकी शिकायत भी एमडी से की गई है। लेकिन अभी तक पेड़ों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

यह है समाधान

जो पेड़ गिर चुके हैं, उन्हें फिर से खड़ा करना मुमकिन नहीं है। जो पेड़ गिरने के कगार पर है, उन्हें अभी भी बचाया जा सकता है। यदि जिम्मेदार समय रहते ही जमीन के कटाव को रोकने की व्यवस्था करें। पेड़ों की जड़ों को मजबूती देने के लिए फिर से मिट्टी डालकर घेरना चाहिए। ऐसा कर इन पेड़ों को बचाया जा सकता है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

 



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