Tuesday, October 4, 2022

पीएम किसान सम्मान निधि: 2 करोड़ की ठगी, 70 हजार पंजीयन फर्जी मिले

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देवभोग’​​​3 घंटे पहलेलेखक: पुरुषोत्तम पात्र

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योजना का लाभ लेने वाले इंकम टैक्सपेयी 659 किसानों से 45 लाख रुपए की अब वसूली की तैयारी है

सॉफ्टवेयर में खामियों की वजह से ठगों ने पीएम किसान सम्मान निधि की आड़ में केंद्र सरकार के खजाने में सेंध मार दी। गरियाबंद में इस योजना के 70 हजार बोगस पंजीयन को कृषि विभाग ने ट्रेस कर लिया है, जिन्हें 2 करोड़ से ज्यादा का भुगतान भी हो चुका है।

दरअसल राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में कुल 1 लाख 27 हजार किसान हैं, जिन्हें किसान किताब आबंटित है जबकि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में 2 लाख 1455 किसानों का पंजीयन हुआ है। यानी 98755 बोगस किसान पीएम योजना के लिए कहां से आ गए, इसकी तलाश जरूरी है।

सॉफ्टवेयर में दर्ज पते पर किसान भी नहीं मिले इसलिए वसूली भी नहीं हो सकती।योजना का लाभ लेने वाले इंकम टैक्सपेयी 659 किसानों से 45 लाख रुपए की अब वसूली की तैयारी है। उपसंचालक संदीप भोई ने बताया कि जिनके पते का मिलान हुआ है उनसे वसूली शुरू कर दी गई है।

इंकम टैक्सपेयी किसान अपात्र थे, उनसे 45 लाख की वसूली होनी है। मामले में अन्य बोगस पंजीयन पर वसूली के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है। पीएम किसान सम्मान निधि की पंजीयन प्रक्रिया में ढील व खामियों के चलते बोगस पंजीयन खाते के जरिये निधि के 2 करोड़ से ज्यादा रुपए का चूना ठगों ने केंद्र सरकार को लगा दिया।

सॉफ्टवेयर में खामी को ठगों ने बनाया सेंधमारी करने का रास्ता
पीएम किसान निधि योजना के लिए एक एप तैयार किया गया। इसका पंजीयन तहसील दफ्तर, कृषि दफ्तर और चॉइस सेंटरों में भी होता है। एप में किसान का नाम, आधार, बैंक खाता व किसान किताब का नंबर डालते ही पंजीयन हो जाता था। पंजीयन से पहले किसान किताब, रकबे का मालिक जिसका आधार व खाता दिया गया है, इसका कोई भी सत्यापन नहीं होता था। इसी खामी को जरिया बनाकर ठगों ने पीएम के कोष में सेंधमारी कर दी।

मैनपुर में 37 हजार तो देवभोग में 15 हजार बोगस किसान
कृषि विभाग के सत्यापन में 69 हजार बोगस पंजीयन का पता चला है, जिसमें 37 हजार नाम मैनपुर तहसील तो देवभोग में 15 हजार से ज्यादा नाम मिले। कृषि विभाग की टीम ने पोर्टल से सूची निकालकर किसानों का सत्यापन किया तो उस नाम के किसान मिले ही नहीं।

देवभोग के आधार व बैंक पासबुक का उपयोग जांजगीर चांपा के किसानों के लिए किया गया था, उसी तर्ज पर यहां की ऋण पुस्तिका व रकबों में दूसरे किसानों के नाम डालकर पंजीयन किया गया है।

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