Monday, October 3, 2022

पहली ही बारिश में खिलने लगा उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल, जानें- क्या है मान्यता?

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Uttarakhand News: मानसून की पहली बरसात में ही उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल (Uttarakhand state flower Brahma Kamal) खिलने लगा है. हेमकुंड साहिब में ब्रह्म कमल खिलने की पहली तस्वीर सामने आईं हैं. इन दिनों हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) पैदल मार्ग पर ब्रह्म कमल फूल खिल रहे हैं. हालांकि सबसे अधिक ब्रह्म कमल अगस्त महीने में खिलते हैं लेकिन हेमकुंड साहिब में इस बार समय से पहले ही ब्रह्म कमल खिलने लगे हैं. ब्रह्मकमल को देवताओं का पुष्प माना जाता है और नंदा अष्टमी के पावन पर्व पर मां नंदा को ब्रह्मकमल से सजाया जाता है.

खिला एक महीने पहले ही
उच्च हिमालयी क्षेत्र में समुद्रतल से 3000 मीटर से लेकर 4800 मीटर तक की ऊंचाई पर खिलने वाले देवपुष्प ब्रह्मकमल से हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग समेत पूरी भ्यूंडार घाटी गुलजार हो गई है. इस बार शीतकाल के दौरान हुई कम बर्फबारी के कारण यहां ब्रह्मकमल एक माह पूर्व खिला है. चमोली जिले में हेमकुंड साहिब समेत अटलाकोटी से आगे पूरे यात्रा मार्ग पर इन दिनों देवपुष्प ब्रह्मकमल अपनी महक बिखेर रहा है. 

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जिस घर में होता है सांप नहीं आते
यहां ब्रह्मकमल जुलाई से लेकर सितंबर तक खिला रहता है लेकिन इस बार शीतकाल के दौरान हुई कम बर्फबारी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जुलाई माह में ही खिलना शुरू हो गया है. वहीं मान्यता है कि जिस घर में ब्रह्मकमल होता है वहां सांप नहीं आते हैं, साथ ही यह अपने आप में औषधीय गुणों से भरपूर है.

अत्यंत प्रिय है शिव-पार्वती का
मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती को ब्रह्मकमल अत्यंत प्रिय है इसलिए हर साल नंदाष्टमी के दिन क्षेत्र की लोकदेवी मां नंदा (पार्वती) को ब्रह्मकमल अर्पित किए जाने की परंपरा है. इस बार नंदाष्टमी सात सितंबर को है. देवी नंदा की छोटी जात (लोकजात) के समापन पर श्रद्धालु इसे प्रसाद स्वरूप घरों में भी ले जाते हैं. 

कैसा होता है ब्रह्मकमल फूल
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खिलने वाला ब्रह्मकमल सफेद और हल्का पीला रंग लिए होता है. यह उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी है. यहां पंचकेदार, पांगरचुला, भनाई, कागभुशंडी, सहस्रताल, नंदीकुंड, फूलों की घाटी, चेनाप घाटी, हेमकुंड साहिब, सतोपंथ, ऋषिकुंड, देवांगन, डयाली सेरा आदि स्थानों पर यह दिव्य पुष्प खिलता है. उत्तराखंड में इसकी 28 प्रजातियां पाई जाती हैं.

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