Tuesday, October 4, 2022

उपचारित सब्जी बीज के लिए खत्म होगी बीज निगम पर निर्भर

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कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सब्जी के उपचारित बीज के लिए किसानों को अब बीज निगम रायपुर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। महिला समूहों के माध्यम से अब गोठानों में ही बीज तैयार की जाएगी। जिला उद्यानिकी विभाग ने इसके लिए सात गोठानों को चयन किया है। प्रारंभिक तौर बरबट्टी, धनिया, मेथी, मूली और प्याज के बीज तैयार किए जाएंगे। एक हेक्टेयर में 35 हजार खर्च कर 70 से 80 हजार कीमत के बीज तैयार होंगे। इस तरह एक सीजन में महिला समूहों को प्रति हेक्टेयर 35 से 40 हजार लाभ होगा।

राज्य शासन ने उपचारित बीज कार्यक्रम शुरू की है। इसका उद्देश्य किसानों को कम कीमत में स्थानीय स्तर पर अच्छी बीज उपलब्ध कराना है। उद्देश्य को पूरा करने और बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अब जिला उद्यानिकी विभाग की ओर से महिला समूहों को प्रेरित किया जा रहा। इसके लिए जिले मे 10 गोठानों को चिन्हांकित किया गया है जहां उपचारित बीज तैयार किया जाएगा। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत शासन ने उद्यानिकी को प्रति हेक्टेयर 35 हजार कीर स्वीकृति दी है। अकेले बरबट्टी बीज की बात करें तो खुले बाजार में 700 रूपये किलो दर में इसकी खरीदी होती है। उद्यानिकी अधिकारी की माने तो एक हेक्टयेर में 35 हजार रूपये खर्च कर एक क्विंटल बीज तैयार होगा। बीज का बाजार मूल्य 70 हजार होगा। इस तरह महिला समूहों को 35 हजार रुपये का लाभ होगा। सब्जी खेती से सीजन भर 20 से 25 हजार का लाभ है वहीं बीज तैयार करने में 10 हजार अधिक फायदा होगा। चयनित गोठानों के लिए बीज तैयार करने के लिए 35 हजार खर्च उद्यानिकी विभाग से होगा। इसके बाद आगामी वर्ष से उत्पादन की जिम्मेदारी गोठान समूहों की होगी। शासन से प्रदान की गई 35 हजार रुपये को खाद व दवा खरीदी के अलाव जुताई व बोआई में खर्च किया जाएगा। उद्यानिकी के माध्यम से कई गोठानों में सब्जी की खेती की जा रही है। उपचारित बीज की उपलब्धता से महिला समूह व्यापक पैमाने सब्जी की व्यवसायिक खेती कर सकेंगे।

क्या है उपचारित बीज

फसलों में मुख्य रूप से बीज, मिट्टी और हवा के माध्यम से रोग फैलता है। बोआई से पहले इसका उपचार करना आवश्यक है। मिट्टी का उपचार कर उसमें आवश्यक पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जाता है। जैविक उर्वरक से फसल लेकर बीज तैयार किया जाता है। फसल जब तक पक न जाए तब तक मौसम के विपरीत परिस्थितियों से सुरक्षा के लिए उसका उपचार किया जाता है। समय सीमा के भीतर तैयार बीज को ही उपचारित बीज कहते हैं।

समूहों की होगी आर्थिक उन्नाति

बीज उत्पादन से महिला समूह आर्थिक रूप से सुदृढ़ तो होंगे ही साथ उनमें आत्मनिर्भरता आएगी। खास बात यह है कि महिला समूह खरीफ के अलावा रबी के दौरान बीज तैयार कर सकेंगे। इसके अलावा गोठानों में उपचारित बीज मिलने से किसानों को खुले बाजार में बीज खरीदी से मुक्ति मिलेगी। बताना होगा कि बिना उचारित बीज को आकर्षक पैक में भर खुले बाजार फर्जी बीज विक्रेता खपाते हैं। उपज नहीं होने पर किसान ठगे जाते हैं।

आयातित सब्जियों से मिलेगी मुक्ति

जिले में ही उपचारित बीज मिलने से किसान वर्ष भर सब्जी की फसल लेंगे। आमतौर पर देखा जाता है कि स्थानीय किसान टमाटर जैसे आवश्यक सब्जी की खेती साल भर नहीं कर पाते। मई जून और जुलाई में इसकी कीतम बढ़ जाती हैं। दीगर जिले से आयातित टमाटर व अन्य सब्जियों बाजार निर्भर रहता है। स्थानीय स्तर पर उपचारित बीज मिलने से किसान कभी भी इसकी बोआई कर सकेंगे।

0 इन गोठानों का चयन

विकासखंड- गोठान

कोरबा- बासिन, कोरकोमा

कटघोरा- बतारी, पंडरीपानी

पाली- सेंद्रीपाली, दमिया, कपोट

आमतौर गोठानों में सब्जियों की खेती की जा रही है। अब यहां बरबट्टी, बैगन, मूल, धनिया आदि की फसल से बीज तैयार भी की जाएगी। इसके लिए जिले में पांच गोठानों को चयनित कर बोआई की जा रही है। फसल की तुलना में उपचारित बीज से महिला समूह के अलावा स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा।

आभा पाठक, उप संचालक, उद्यानिकी

Posted By: Nai Dunia News Network

 



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