Wednesday, October 5, 2022

अधूरी जानकारी लेकर पेश हुए अफसर: डिबार कंपनी को भुगतान की जांच कर विधानसभा की समिति पहली बार बैठी थी, मार्च में हुई थी घोषणा

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रायपुर4 घंटे पहले

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डीबार कंपनी को भुगतान के मामले की जांच के लिए विधानसभा की समिति मंगलवार को पहली बार बैठी। जांच शुरू हुई, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य कृषि एवं बीज विकास निगम के अफसर अधूरी जानकारी लेकर पहुंचे। नाराज अध्यक्ष ने अफसरों को पूरी जानकारी भेजने का निर्देश देकर वापस कर दिया। इस जांच समिति का गठन मार्च 2022 में हुआ था।

अभनपुर से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक धनेंद्र साहू की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर में मंगलवार को जांच समिति की बैठक हुई। इसमें विधायक नारायण चंदेल, लखेश्वर बघेल और संगीता सिन्हा भी शामिल हुईं। बात जांच के विषय और बिंदुओं पर शुरू हुई। बीज निगम के अफसरों से इसकी पूरी जानकारी मांगी गई तो पता चला कि उनके पास इससे जुड़ी जानकारी ही नहीं है। उसके बाद विधायक उन पर भड़क गए। दैनिक भास्कर से बातचीत में विधायक धनेंद्र साहू ने कहा, “वहां आए अफसरों के पास पूरी जानकारी नहीं थी। ऐसे में उनको पूरी जानकारी समिति के पास भेजने को कहा गया है। वह जानकारी मिल जाने के बाद समिति की अगली बैठक होगी।’ विधानसभा की जांच समिति का गठन मार्च 2022 में हुआ। इसे अगली बैठक यानी मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।

अफसरों ने डीबार कंपनी को भुगतान किया

मामला साल 2021 का है। उस साल विधानसभा में छत्तीसगढ़ कृषि एवं बीज विकास निगम को भेजे गए हाइब्रीड बीज के खराब गुणवत्ता का मामला उठा। सरकारी जांच में खराब गुणवत्ता प्रमाणित पाई गई थी, ऐसे में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने आपूर्तिकर्ता कंपनी त्रिमूर्ति प्लांट साइंस कंपनी को प्रतिबंधित करने की घोषणा की। इसमें उसका भुगतान भी रोकना था और उसके बीजों को राजसात भी करना था। बीज निगम ने ऐसा कर भी दिया। कुछ महीने बाद बीज निगम ने केवल भुगतान के लिए इस डीबार कंपनी से प्रतिबंध हटा लिया। उसको 2 करोड़ 61 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया।

बजट सत्र में फिर उठा मामला, कृषि मंत्री ने माना की गलती हुई है

साल 2022 में विधानसभा के बजट सत्र में यह मामला फिर उठा। इस बार कृषि मंत्री ने इसे गलती बताया। विपक्ष ने विधानसभा की समिति से जांच की मांग की। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने इसे स्वीकार कर लिया। इसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विधानसभा की समिति ने जांच कराने की घोषणा कर दी। 25 मार्च को विधानसभा के तत्कालीन प्रमुख सचिव चंद्रशेखर गंगराड़े ने पांच विधायकों की एक समिति के गठन का आदेश जारी कर दिया। इस जांच समिति में कांग्रेस के तीन और भाजपा के दो विधायकों को शामिल किया गया।

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